नई दिल्ली: अब माता-पिता अपने बच्चों के लिए स्कूल चुनते वक्त Ofsted की रिपोर्ट्स पर भरोसा नहीं कर रहे। इसकी जगह वे TikTok और Instagram जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स से सलाह ले रहे हैं। एक नई रिसर्च में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है, जो बताता है कि स्कूल चुनने का तरीका तेजी से बदल रहा है।
सोशल मीडिया का बढ़ता असर
गुड स्कूल्स गाइड (GSG) की रिपोर्ट कहती है कि माता-पिता लंबी-लंबी Ofsted रिपोर्ट्स पढ़ने के बजाय छोटे-छोटे वीडियो और ‘एजु-इन्फ्लुएंसर्स’ की सलाह देखना ज्यादा पसंद कर रहे हैं।
GSG की मैनेजिंग एडिटर मेलानी सैंडरसन ने चेतावनी दी, “अब माता-पिता Ofsted की रिपोर्ट्स नहीं पढ़ रहे, वे TikTok देख रहे हैं। यह चिंता की बात है। स्कूल चुनना कोई हैंडबैग या मेकअप खरीदने जैसा फैसला नहीं है। शिक्षा और सेहत से जुड़े फैसले सतही वीडियो पर नहीं छोड़े जा सकते।”
Ofsted का नया सिस्टम
यह ट्रेंड ऐसे वक्त में सामने आया है जब Ofsted नवंबर से अपना ‘सिंगल-वर्ड रेटिंग सिस्टम’ खत्म करने जा रहा है। अब एक नया कलर-कोडेड सिस्टम लाया जाएगा, जिसमें 10 कैटेगरी में स्कूलों को 5 अलग-अलग रैंक दिए जाएंगे। मकसद है—रिपोर्ट्स को माता-पिता के लिए और आसान बनाना।
GSG की रिसर्च में क्या पता चला?
2,000 माता-पिता पर किए गए सर्वे में सामने आया:
- सिर्फ 31% माता-पिता स्कूल चुनने के लिए Ofsted की रिपोर्ट्स पर भरोसा करते हैं।
- Gen Z माता-पिता में यह भरोसा और कम होकर 21% रह जाता है।
- करीब 16% माता-पिता सोशल मीडिया का सहारा लेते हैं, जबकि Gen Z में यह आंकड़ा 29% तक पहुंच जाता है।
- वहीं, 12% माता-पिता AI टूल्स (जैसे ChatGPT) का इस्तेमाल करते हैं। यह आंकड़ा युवा माता-पिता में 16% है।
माता-पिता क्यों छोड़ रहे हैं Ofsted की रिपोर्ट्स?
मेलानी सैंडरसन के मुताबिक, माता-पिता स्कूलों के असली माहौल की झलक चाहते हैं, जो Ofsted की सूखी और तकनीकी रिपोर्ट्स में नहीं मिलती।
उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर कई ‘भ्रामक’ अकाउंट्स पुराने डेटा या अधूरी जानकारी के आधार पर “बेस्ट” और “वर्स्ट” स्कूल्स की लिस्ट शेयर करते हैं। कई लोग खुद को स्कूल/यूनिवर्सिटी कोच बताकर सलाह देते हैं, लेकिन उनकी जानकारी में गहराई और भरोसेमंद फैक्ट्स की कमी होती है।
Ofsted का जवाब
Ofsted के प्रवक्ता ने कहा, “हमारी रिपोर्ट्स अब भी कई माता-पिता के लिए अहम स्रोत हैं। इस साल के अंत तक हम अपने इंस्पेक्शन और रिपोर्टिंग सिस्टम में बदलाव कर रहे हैं, ताकि माता-पिता को स्कूलों, कॉलेजों और नर्सरीज़ के बारे में साफ, विस्तृत और उपयोगी जानकारी मिल सके।”
निष्कर्ष
TikTok और Instagram जैसे प्लेटफॉर्म्स पर माता-पिता की बढ़ती निर्भरता दिखाती है कि वे आसान और तुरंत समझ आने वाली जानकारी चाहते हैं। लेकिन शिक्षा जैसे बड़े फैसले सिर्फ सतही वीडियो पर छोड़ना खतरनाक हो सकता है। शायद Ofsted का नया सिस्टम इस अंतर को कम करने में मदद करे। तब तक, माता-पिता को सतर्क रहकर आधिकारिक रिपोर्ट्स पर भरोसा करना चाहिए।
डिस्क्लेमर: यह जानकारी सामान्य और शैक्षिक उद्देश्यों के लिए है। स्कूल चुनने से पहले माता-पिता को हमेशा Ofsted की आधिकारिक रिपोर्ट्स और विश्वसनीय स्रोतों से जानकारी लेनी चाहिए।



