बिहार की राजनीति में प्रशांत किशोर (PK) की नई पहल जन सुराज एक बार फिर चर्चा में है। सोशल मीडिया पर तेज़ी से वायरल हो रही एक रील में PK ने बिहार के विकास मॉडल, पुराने नेताओं की राजनीति और अपने नए विज़न को बेबाकी से सामने रखा है। रील अब ऑनलाइन बहस का केंद्र बन गई है।
30 साल बाद भी बिहार मज़दूरों का राज्य क्यों?
रील की शुरुआत एक भावनात्मक सवाल से होती है—
बिहार के युवा आज भी रोज़गार के लिए दिल्ली, गुजरात और चेन्नई जैसे राज्यों में क्यों पलायन कर रहे हैं?
PK इस स्थिति को पिछले 30 वर्षों की राजनीति की नाकामी बताते हैं।
लालू–नीतीश पर सीधा निशाना
वीडियो में PK साफ़ कहते दिखते हैं कि बिहार की समस्याओं की जड़ वही पुरानी राजनीति है, जो दशकों से जाति और भ्रष्टाचार के इर्द-गिर्द घूमती रही है।
उनके मुताबिक, लालू यादव हों या नीतीश कुमार— दोनों की सरकारें राज्य को सही दिशा नहीं दे सकीं।
‘जन सुराज’ के साथ PK का नया राजनीतिक प्रयोग
रील के अगले हिस्से में PK जन सुराज को एक सकारात्मक बदलाव के रूप में पेश करते हैं।
वह दावा करते हैं कि उनका अभियान बिहार की नब्ज़ को समझने और जमीनी स्तर के समाधान खोजने की कोशिश है।
शिक्षा, स्वास्थ्य, रोज़गार— नया बिहार मॉडल
PK के विज़न के मुताबिक जन सुराज चार बड़े मुद्दों पर काम करेगा—
शिक्षा, स्वास्थ्य, रोज़गार और भ्रष्टाचार-मुक्त शासन।
वह बच्चों के लिए बेहतर शिक्षा व्यवस्था पर ज़ोर देते हैं और खेती को “खाने वाली खेती” से “कमाने वाली खेती” में बदलने की बात करते हैं— यानी सब्ज़ी, मसाला और मूल्य आधारित फसलें।
छठ पर बड़ा वादा— पलायन रोकने का संकल्प
रील में PK छठ पूजा पर घर लौटे लोगों से अपील करते कहते हैं—
“इस बार वोट विकास, शिक्षा और रोज़गार के लिए दीजिए।”
उनका दावा है कि अगर जन सुराज को मौका मिला, तो किसी बिहारी को रोज़गार के लिए राज्य से बाहर नहीं जाना पड़ेगा।
“या तो 10 सीटें… या 150+” — PK का बड़ा दावा
रील के अंत में PK एक दिलचस्प भविष्यवाणी करते हैं—
“जन सुराज या तो 10 से कम सीटें जीतेगी, या 150 से ज़्यादा।”
इस बयान ने राजनीतिक हलकों में नई चर्चा छेड़ दी है।
अब बड़ा सवाल
क्या बिहार की राजनीति इस बार वाकई शिक्षा और रोज़गार पर वोट डालेगी?
PK की यह वायरल रील चुनावी माहौल में नई गर्मी ले आई है।



