अफगानिस्तान में 6.01 तीव्रता का भूकंप: 800-900 की मौत, क्यों थी इतनी भयानक तबाही?

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अफगानिस्तान के पूर्वी हिस्से में रविवार रात (31 अगस्त 2025) को 6.01 तीव्रता का भीषण भूकंप आया, जिसने चारों तरफ तबाही मचा दी। इस आपदा में 800-900 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई और कम से कम 2,000 लोग घायल हो गए। भूकंप का केंद्र नंगरहार प्रांत के जलालाबाद से 27 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में था और इसकी गहराई सिर्फ 8 किलोमीटर थी। आइए समझते हैं कि यह भूकंप इतना घातक क्यों साबित हुआ और अफगानिस्तान में बार-बार भूकंप क्यों आते हैं।

भूकंप कैसे आता है?

भूकंप तब आता है जब पृथ्वी की सतह के नीचे चट्टानों के ब्लॉक अचानक खिसकते हैं। इससे निकलने वाली ऊर्जा तरंगों के रूप में फैलती है और धरती को हिलाती है। पृथ्वी की बाहरी परत यानी क्रस्ट कई टेक्टोनिक प्लेट्स में बंटी होती है। जब ये प्लेट्स टकराती हैं या खिसकती हैं और अचानक रिलीज होती हैं, तो भूकंप आता है।
USGS के मुताबिक, भूकंप की शुरुआत सतह के नीचे जिस जगह से होती है उसे हाइपोसेंटर कहते हैं और इसके ठीक ऊपर की जगह एपिसेंटर कहलाती है।

गहराई क्यों मायने रखती है?

उथले भूकंप (0–70 किमी गहराई) ज्यादा तबाही मचाते हैं क्योंकि ऊर्जा सतह तक सीधी पहुंचती है। गहरे भूकंप में यह ऊर्जा कमजोर हो जाती है। इस बार की गहराई केवल 8 किमी थी, जिससे नंगरहार और कुनार में बने मिट्टी-पत्थर के घर ढह गए।
इसके अलावा, हर 1 मैग्निट्यूड की बढ़ोतरी से भूकंपीय तरंगों की ताकत 10 गुना और ऊर्जा 32 गुना बढ़ जाती है। इसलिए 6.01 तीव्रता का भूकंप 5.0 की तुलना में कहीं ज्यादा खतरनाक होता है।

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अफगानिस्तान में बार-बार भूकंप क्यों आते हैं?

अफगानिस्तान भारतीय और यूरेशियन टेक्टोनिक प्लेट्स के टकराव वाले इलाके में बसा है। ये प्लेट्स हर साल करीब 45 मिलीमीटर की रफ्तार से पास आती हैं। इसी वजह से हिंदू कुश क्षेत्र दुनिया के सबसे भूकंप-प्रवण इलाकों में से एक है।
ब्रिटिश जियोलॉजिकल सर्वे के सिस्मोलॉजिस्ट ब्रायन बैप्टी के मुताबिक, यहां हर साल दुनिया की कुल भूकंपीय ऊर्जा का करीब 15% हिस्सा निकलता है। 1900 के बाद से हिंदू कुश में 7.0 से ज्यादा तीव्रता वाले 12 भूकंप आ चुके हैं।

भूकंप का इतिहास

2023 में हेरात प्रांत में आए तीन बड़े भूकंपों में करीब 1,300 लोग मारे गए थे। 2022 में 5.9 तीव्रता के भूकंप ने भी 1,300 लोगों की जान ली थी। इस बार कुनार और नंगरहार में कमजोर मकानों और भूस्खलन ने तबाही को और बढ़ा दिया।

मौजूदा हालात

कुनार प्रांत के कई गांव पूरी तरह बर्बाद हो गए। नंगरहार के दराई नूर जिले में 9 लोगों की मौत हुई, जिनमें बच्चे भी शामिल हैं। तालिबान सरकार के प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद के अनुसार, कुनार में 800 से ज्यादा मौतें और 2,500 घायल हुए हैं। नंगरहार में 12 मौतें और 255 लोग घायल हुए। हेलिकॉप्टर से घायलों को जलालाबाद अस्पताल पहुंचाया जा रहा है, लेकिन भूस्खलन और दुर्गम रास्तों से राहत कार्यों में दिक्कतें आ रही हैं।

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निष्कर्ष

6.0 तीव्रता का यह भूकंप अपनी उथली गहराई और कमजोर इमारतों की वजह से बेहद घातक साबित हुआ। हिंदू कुश क्षेत्र हमेशा भूकंप के खतरे में रहता है। भारत ने मदद के तौर पर 1,000 टेंट और 15 टन खाद्य सामग्री भेजी है।

डिस्क्लेमर:
यह जानकारी सामान्य शैक्षिक उद्देश्य के लिए है। ताजा अपडेट के लिए आधिकारिक स्रोत देखें।