यह परेड सिर्फ एक जश्न नहीं था, बल्कि दुनिया के लिए संदेश था। जापान की हार के 80 साल पूरे होने पर चीन ने दिखाया कि उसकी सैन्य ताकत किसी से कम नहीं।
किम जोंग उन और पुतिन की मौजूदगी ने साफ कर दिया कि बीजिंग अब एशिया में ही नहीं, बल्कि वैश्विक राजनीति में भी एक अहम भूमिका निभा रहा है। इंटरकॉन्टिनेंटल मिसाइल, सुपरसोनिक एंटी-शिप क्रूज मिसाइल और ड्रोन के प्रदर्शन ने पश्चिमी देशों को सीधा संदेश भेजा कि चीन तैयार है।

